13 सितंबर 2024 को DPI (Directorate of Public Instruction) द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया, जिसमें अतिथि शिक्षकों (Guest Teacher) की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े दिशा-निर्देश स्पष्ट किए गए हैं। यह आदेश जिला शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा संस्थानों के लिए लागू है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम इस नए आदेश और इसकी प्रमुख बातों को विस्तार से समझेंगे।
1. DPI द्वारा जारी नए आदेश का अवलोकन
DPI ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी किया है। इसमें यह स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि Guest Teachers को नियुक्त करने से पहले उनके पिछले वर्ष के परीक्षा परिणामों का अवलोकन किया जाना चाहिए।
2. कम परीक्षा परिणाम वाले अतिथि शिक्षकों पर स्पष्टता
इस आदेश में विशेष रूप से उन अतिथि शिक्षकों (Atithi Shikshak) के बारे में बात की गई है जिनका पिछले शैक्षिक सत्र में 30% से कम परीक्षा परिणाम रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह अफवाह फैल रही थी कि ऐसे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन DPI के इस नए आदेश ने इस भ्रम को पूरी तरह से दूर कर दिया है।
3. जॉइनिंग प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम
DPI ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों को Guest Teachers के पिछले वर्ष के परीक्षा परिणामों का सावधानीपूर्वक अवलोकन करना चाहिए। यदि किसी अतिथि शिक्षक का परिणाम 30% से कम है, तो उसकी नियुक्ति नहीं की जाएगी, चाहे वह जॉइनिंग रिक्वेस्ट भेजे या न भेजे।
4. जॉइनिंग रिक्वेस्ट एक्सेप्ट या रिजेक्ट करने का तरीका
GFMS (Guest Faculty Management System) पोर्टल पर अतिथि शिक्षक अपनी जॉइनिंग रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। लेकिन संस्थान के प्रमुख को उनके परीक्षा परिणाम के आधार पर ही उस रिक्वेस्ट को Accept या Reject करना होगा। DPI के इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अतिथि शिक्षक की जॉइनिंग केवल परीक्षा परिणाम के आधार पर ही हो सकती है।
5. नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता
DPI द्वारा जारी इस नए आदेश ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की है। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल योग्य अतिथि शिक्षकों (जिनका परीक्षा परिणाम 30% से अधिक है) की ही नियुक्ति की जाए।
निष्कर्ष
Guest Teacher (Atithi Shikshak) की नियुक्ति को लेकर DPI द्वारा जारी यह नया आदेश एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी और परीक्षा परिणामों के आधार पर ही योग्य शिक्षकों को मौका मिलेगा।
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